Friday, March 6, 2026

गुरुचरित्र- अध्याय १

 

गुरुचरित्र 

अध्याय १-मंगलाचरण 

सिद्धमुनी आणि नामधारकाची भेट

(ओवीसंख्या १४९)

॥ ॐ ॥

या अध्यायात काय आहे:

गुरुचरित्राचा पहिला अध्याय श्रीगणेशाच्या मंगलस्मरणाने सुरू होतो आणि तत्पश्चात सूतमुनी गुरूच्या परममहिमेचे वर्णन करतात—गुरू हेच ब्रह्मा, विष्णू आणि महेश यांचे एकत्र स्वरूप असून त्यांच्या कृपेनेच जीवाला अज्ञान, दुःख आणि संसारबंधनातून मुक्ती मिळते. नामधारक आपल्या जीवनातील संकटांनी व्याकुळ होऊन गुरूंच्या चरणी प्रार्थना करतो आणि “मी गुरूभक्त असूनही माझ्यावर दुःख का येते?” अशी साधकाच्या मनातील शाश्वत शंका व्यक्त करतो. त्यावर सूतमुनी त्याला शांत करीत म्हणतात की श्रीगुरूंचे चरित्र श्रवण हेच सर्व दुःखनिवारणाचे औषध आहे, आणि याच संवादातून संपूर्ण ग्रंथाचा आध्यात्मिक प्रवास सुरू होतो.

सूची:

  • श्री गणेश स्तुती 
  • श्री सरस्वती स्तुती
  • त्रिदेव-स्मरण
  • समग्र देवदेवतांस वंदन
  • स्वकुळाचा इतिहास
  • गुरुचरित्र लिहिण्याचा संकल्प
  • गुरुचरित्राचा महिमा
  • श्रीनृसिंहसरस्वतींचा (श्रीगुरूंचा) महिमा
  • नामकरणी नावाचा शिष्य श्रीगुरूंना भेटण्याचा निश्चय करतो
  • नामकरणी  श्रीगुरूंची प्रार्थना करतो

🌺 🌺 🌺 

श्रीगणेशाय नमः | श्री सरस्वत्यै नमः | श्रीगुरुभ्यो नमः | श्रीकुलदेवतायै नमः ||

श्रीपादश्रीवल्लभ-श्रीनृसिंहसरस्वती-दत्तात्रेयसद्गुरुभ्यो नमः: ||

श्री गणेश स्तुती 

ॐ नमोजी विघ्नहरा | गजानना गिरिजाकुमरा | जय जय लंबोदरा | एकदंता शूर्पकर्णा || १ ||

हालविशी कर्णयुगुले | तेथूनि जो का वारा उसळे | त्याचेनि वाते विघ्न पळे | विघ्नांतक म्हणती || २ ||

तुझे शोभे अन्न | जैसे तप्त कांचन | किंवा उदित प्रभारमण | तैसे तेज फाकतसे || ३ ||

विघ्नकाननछेदनासी | हाती फरश धरिलासी || नागबंद कटीसी | उरग यज्ञोपवीत || ४ ||

चतुर्भुज दिससी निका | विशालाक्षा विनायका | प्रतिपाळिसी विश्वलोका | निर्विघ्ने करूनिया || ५ ||

तुझे चिंतन जे करिती | त्या विघ्ने न बाधती | सकळाभीष्टे  साधती | अविलंबेसी || ७ ||

सकळ मंगल कार्यासी | प्रथम वंदिजे तुम्हासी | चतुर्दश विद्यांसी | स्वामी तूचि लंबोदरा || ७ ||

वेद शास्त्रे पुराणे | तुझेचि असेल बोलणे | ब्रह्मादिकि या कारणे | स्तविला असे सुरवरी || ८ ||

त्रिपुर साधन करावयासी | ईश्वरे अर्चिले तुम्हासी | संहारावया दैत्यांसी | पहिले तुम्हांसी स्तविले || ९ ||

हरिहर ब्रह्मादिक गणपती | कार्यारंभी तुज वंदिती | सकळाभीष्टे साधती | तुझेनि प्रसादे || १० ||

कृपानिधी गणनाथा | सुरवरदिका विघ्नहर्ता | विनायका अभयदाता | मतिप्रकाश करी मज || ११||

समस्त गणांचा नायक | तूचि विघ्नांचा अंतक |  तूते वंदिती जे लोक | कार्य साधे तयांचे || १२ ||

सकळ कार्या आधारू | तूचि कृपेचा सागरू | करुणानिधि गौरीकुमरू | मतिप्रकाश करी मज || १३ ||

माझे मनींची वासना | तुवा पुरवावी गजानना | साष्टांग करितो नमना | विद्या देई मज आता || १४ ||

नेणता होतो मतिहीन | म्हणोनि धरिले तुझे चरण | चौदा विद्यांचे निधान | शरणागतवरप्रदा || १५ ||

माझिया अंत:करणीचे व्हावे | गुरुचरित्र कथन करावे | पूर्णदृष्टीने पहावे | ग्रंथसिद्धि पाववी दातारा || १६ ||

श्री सरस्वती स्तुती 

आता वंदू ब्रह्मकुमारी | जिचे नाम वागीश्वरी | पुस्तक वीणा जिचे करी | हंसवाहिनी असे देखा || १७ ||

म्हणोनि नसतो तुझे चरणी | प्रसन्न व्हावे मज स्वामिणी | राहोनिया माझिये वाणी | ग्रंथी रिघू करी आता || १८ ||

विद्या वेद शास्त्रांसी | अधिकार जाणा शारदेसी | तिये वंदिता विश्वासी | ज्ञान होय अवधारा || १९ ||

ऐक माझी विनंती | द्यावी आता अवलीला मती | विस्तार करावया गुरुचरित्री | मतिप्रकाश करी मज || २० ||

जय जय जगन्माते | तूचि विश्वी वाग्देवते | वेदशास्त्रे तुझी लिखिते | नांदविशी येणेपरी || २१ ||

माते तुझिया वाग्बाणी | उत्पत्ति वेदशास्त्रीपुराणी | वदता साही  दर्शनी | त्यांते अशक्य परियेसा || २२ ||

गुरूचे नामी तुझी स्थिती | म्हणती नृसिंहसरस्वती | याकारणे मजवरी प्रीति | नाम आपुले म्हणूनी || २३ ||

खांबसूत्रीची बाहुली जैसी | खेळती तया सूत्रासरसी | स्वतंत्रबुधि नाही त्यांसी | वर्तती आणिकाचेनि मते || २४ ||

तैसे तुझेनि अनुमते | माझे जिव्हे प्रेरी माते | कृपानिधि वाग्देवते| म्हणोनि विनवी तुझा बाळ || २५ ||

म्हणोनि नमिले तुझे चरण | व्हावे स्वामिणी प्रसन्न | द्यावे माते वरदान | ग्रंथी रिघू करवी आता || २६ ||

त्रिदेव-स्मरण:

आता वंदू त्रिमूर्तीसी | ब्रह्माविष्णुशिवांसी | विद्या मागे मी त्यांसी | अनुक्रमे करोनी || २७ ||

चतुर्मुखे असती ज्यासी | कर्ता जो का सृष्टीसी | वेद झाले बोलते ज्यासी | त्याचे चरणी नमन माझे || २८ ||

आता वंदू हृषिकेशी | जो नायक त्या विश्वासी | लक्ष्मी सहित अहर्निशी | क्षीरसागरी असे जाणा || २९ ||

चतुर्बाहु नरहरी | शंख चक्र गदा करी | पद्महस्त मुरारी | पद्मनाभ परियेसा || ३० ||

पीतांबर असे कसियेला | वैजयंती माळा गळा | शरणागता अभीष्ट सकळा | देता होय कृपाळू || ३१ ||

आता नमू शिवासी | धरिली गंगा मस्तकेसी | पंचवक्त्र दहा भुजेसी | अर्धांगी असे जगन्माता || ३३ ||

पंचवदने असती ज्यासी | संहारी जो या सृष्टीसी | म्हणोनि बोलती स्मशानवासी | त्यांचे चरणी नमन माझे || ३३ ||

व्याघ्रांबर पांघरून | सर्वांगी असे सर्पवेष्टण | असा शंभु उमारमण | त्याचे चरणी नमन माझे || ३४ ||

समग्र देवदेवतांस वंदन:

नमन समस्त सुरवरा | सिद्धसाध्यां अवतारा | गंधर्वयक्षकिन्नरा| ऋषीश्वरा नमन माझे  || ३६ ||

वंदू आता कविकुळासी |  पराशरादि व्यासांसी| वाल्मीकादि सकळिकांसी |  नमन माझे परियेसा || ३६ ||

नेणे कवित्व असे कैसे | म्हणोनि तुम्हा विनवितसे | ज्ञान द्यावे जी भरवसे | आपुला दास म्हणोनि || ३७ ||

न कळे ग्रंथप्रकार | नेणे शास्त्रांचा विचार | भाषा नये महाराष्ट्र | म्हणोनि विनवी तुम्हासी || ३८ ||

समस्त तुम्ही कृपा करणे | माझिया वचना साह्य होणे | शब्दव्युत्पत्तीही नेणे | कविकुळ तुम्ही प्रतिपाळा || ३९ ||

ऐसे सकळिका विनवोनि | मग ध्याइले पूर्वज मनी | उभयपक्ष जनकजननी || ४० ||

स्वकुळाचा इतिहास:

आपस्तंबशाखेसी | गोत्र कौंडिण्य महाऋषि | साखरे नाम ख्यातिशी |  सायंदेवापासाव || ४१ ||

त्यापासूनि नागनाथ | देवराव तयाचा सुत | सदा श्रीसद्गुरुचरण ध्यात | गंगाधर जनक माझा || ४२ ||

नमन करिता जनकचरणी | मातापूर्वज ध्यातो मनी | जो का पूर्वज नामधारणी | आश्वलायन शाखेचा || ४३ ||

काश्यपाचे गोत्री | चौंडेश्वरी नामधारी | वागे जैसा जन्हु अवधारी | अथवा जनक गंगेचा || ४४ ||

त्याची कन्या माझी जननी | निश्चये जैशी भवानी | चंपा नामें पुण्यखाणी | स्वामिणी माझी परियेसा || ४५ ||

गुरुचरित्र लिहिण्याचा संकल्प:

नमिता जनकजननीसी | नंतर नमू श्रीगुरुसी | घाली मति प्रकाशी | गुरुचरण स्मरावया || ४६ ||

गंगाधराचे कुशी | जन्म झाला परियेसी | सदा  ध्याय श्रीगुरुसी | एका भावे निरंतर || ४७ ||

म्हणोनि सरस्वती गंगाधर | करी संतांसी नमस्कार | श्रोतया विनवी वारंवार | क्षमा करणे बाळकासी || ४८ ||

वेदाभ्यासी संन्यासी | यती योगेश्वर तापसी |  सदा न्यायी श्रीगुरुसी | तयांसी माझा नमस्कार || ४९ ||

विनवितसे समस्तांसी | अल्पमती आपणासी | माझे बोबडे बोलांसी  सकळ तुम्ही अंगिकारा || ५० ||

तावन्मात्र माझी मति | नेणे काव्यव्युत्पत्ति | जैसे श्रीगुरु निरोपिती | तेणे परी सांगत || ५१ ||

पूर्वापार आमुचे वंशी | गुरु प्रसन्न अहर्निशी | निरोप देती माते परियेसी | चरित्र आपुले विस्तारावया || ५२ ||

म्हणे ग्रंथ कथन करी | अमृतघट स्वीकारी | तुझे वंशी परंपरी | लाधती चारी पुरुषार्थ || ५३ ||

गुरुवाक्य मज कामधेनु | मनी नाही अनुमानु | सिद्धि पावविणार आपणु | श्रीनृसिंहसरस्वती || ५४ ||

त्रैमूर्तीचा अवतार | झाला नृसिंहसरस्वती नर | कवण जाणे याचा  पार | चरित्र कवणा न वर्णवे || ५५ ||

चरित्र ऐसे श्रीगुरुचे | वर्णू न शके मी वाचे | आज्ञापन असे श्रीगुरुचे | म्हणोनि वाचे बोलतसे || ५६ ||

गुरुचरित्राचा महिमा:

ज्यास पुत्रपौत्री असे चाड | त्यासी कथा हे असे गोड | लक्ष्मी वसे अखंड | तया भुवनी परियेसा || ५७ ||

ऐशी कथा जयाचे घरी | वाचिती नित्य प्रेमभरी | श्रियायुक्त निरंतरी | नांदती पुत्रकलत्रयुक्त || ५८ ||

रोग नाही तया भुवनी | सदा संतुष्ट गुरुकृपेकरोनि | नि:संदेह साता दिनी | ऐकता बंधन तुटे जाणा || ५९ ||

ऐसी पुण्यपावन कथा | सांगेन ऐक विस्तारता | सायासाविण होय साध्यता | सद्य:फल प्राप्त होय || ६० ||

निधान लाभे अप्रयासी | तरी कष्ट का सायासी | विश्वास माझिया बोलासी | ऐका श्रोते एकचित्ते || ६१ ||

आम्हा साक्षी अप्रयासी | म्हणोनि विनवितसे बळे | श्रीगुरुस्मरण असे भले | अनुभवा हो सकळिक || ६२ ||

तृप्ति झालियावरी ढेकर | देती जैसे जेवणार | गुरुमहिमेचा उद्गार | बोलतसे अनुभवोनि || ६३ ||

मी सामान्य म्हणोनि | उदास व्हाल माझे वचनी | मक्षिकेच्या मुखांतुनी | मधु केवी ग्राह्य होय || ६४ ||

जैसे शिंपल्यात मुक्ताफळ | अथवा कर्पूर कर्दळ | विचारी पा अश्वत्थमूळ | कवणापासाव उत्पत्ति || ६५ ||

ग्रंथ कराल उदास | वाकुड कृष्ण दिसे ऊस | अमृतवत निघे त्याचा रस | दृष्टि द्यावी तयावरी || ६६ ||

तैसे माझे बोलणे | ज्याची चाड गुरुस्मरणे | अंगिकार करणार शहाणे | अनुभविती एकचित्ते || ६७ ||

ब्रह्मरसाची गोडी | अनुभवितां फळे रोकडी | या बोलाची आवडी |  ज्यासी संभवे अनुभव || ६८ ||

गुरुचरित्र कामधेनु | ऐकता होय महाज्ञानु | श्रोती करोनिया सावध मनु | एकचित्ते परियेसा || ६९ ||

श्रीनृसिंहसरस्वतींचा (श्रीगुरूंचा) महिमा:

श्रीगुरु नृसिंहसरस्वती | होते गाणगापुरी ख्याति | महिमा त्यांचा अत्यदृभुती | सांगेन एका एकचित्ते || ७० ||

तया ग्रामी वसती गुरु | म्हणोनि महिमा असे थोरु | जाणती लोक चहू राष्ट्रु | समस्त जाती यात्रेसी || ७१ ||

तेथे राहोनि आराधिती | त्वरित होय फलप्राप्ति | पुत्र दारा धन संपत्ति | जे जे इच्छिले होय जना || ७२ ||

लाधोनिया संताने | नामें ठेविती नामकरणे | संतोषरूपे येऊन | पावती चारी पुरुषार्थ || ७३ ||

नामकरणी नावाचा शिष्य श्रीगुरूंना भेटण्याचा निश्चय करतो : 

ऐसे असता वर्तमानी | भक्त एक 'नामकरणी' | कष्टतसे अति गहनी | सदा ध्याय श्रीगुरुसी || ७४ ||

ऐसे मनी व्याकुळित | चिंतेने वेष्टिला बहुत | गुरुदर्शना जाऊ म्हणत | निर्वाणमानसे निघाला || ७५ ||

अति निर्वाण अंत:करणी | लय होवोनि गुरुचरणी | जातो शिष्यशिरोमणी | विसरोनिया क्षुधातृषा || ७६ ||

निर्धार करोनि मानसी | म्हणे पाहीन श्रीगुरुसी | अथवा सांडीं देहासी | जडस्वरूपे काय काज || ७७ ||

नामकरणी  श्रीगुरूंची प्रार्थना करतो:

ज्याचे नामस्मरण करिता | दैन्यहानि होय त्वरिता | आपण तैसे नामांकिता | किंकर म्हणतसे || ७८ ||

दैव असे आपुले उणे | तरी का भजावे श्रीगुरुचरण | परिस लावता लोहा जाण‌ | सुवर्ण केवी होतसे || ७९ ||

तैसे तुझे नाम परिसे | माझे हृदयी सदा वसे | माते कष्टी सायासे | ठेविता लाज कविताही || ८० ||

या बोलाचिया हेवा | मनी धरोनि पहावा | गुरुमूर्ती सदाशिवा | कृपाळू बा सर्वभूती || ८१ ||

अतिव्याकुळ अंत:करणी | निंदास्तुति आपुली वाणी | कष्टला भक्त नामकरणी | करिता होय परियेसा || ८२ ||

राग स्वेच्छा ओवीबद्ध म्हणावे | आजि पाहुणे पंढरीचे रावे | वंदू विघ्नहरा भावे | नमू ते सुंदरा शारदेसी || ८३ ||

गुरूची त्रैमूर्ति | म्हणती वेदश्रुति | सांगती दृष्टांती | कलियुगात || ८४

कलियुगात ख्याति | श्रीनृसिंहसरस्वती | भक्तांसी सारथी | कृपासिंधु || ८५ ||

कृपासिंधु भक्ता | वेद वाखाणिता | त्रयमूर्ति गुरुकृपा | म्हणोनिया || ८६ ||

त्रयमूर्तीचे गुण | तू एक निधान | भक्तांसी रक्षण | दयानिधि || ८७ ||

दयानिधि यती | विनवितो मी श्रीपती | नेणे भावभक्ति  | अंत:करणी || ८८ ||

अंत:करणी स्थिरु | नव्हे बा श्रीगुरु | तू कृपासागरु | पाव वेगी || ८९ ||

पाव वेगी आता | नरहरी अनंता | बाळालागी माता | केवी टाकी || ९० ||

तू माता तू पिता | तूचि सखा भ्राता | तूचि कुळदेवता | परंपरी || ९१ ||

वंशपरंपरी | धरूनि निर्धारी | भजतो मी नरहरी | सरस्वतीसी || ९२ ||

सरस्वती नरहरी | दैन्य माझे हरी | म्हणूनि मी निरंतरी | सदा कष्टे वारी || ९३ ||

सदा कष्टी चित्ता | का हो देशी आता | कृपासिंधु भक्ता | केवी होसी || ९४ ||

कृपासिंधु भक्ता | कृपाळू अनंता | त्रयमूर्ति जगन्नाथा | दयानिधी || ९५ ||

त्रयमूर्ति तू होसी | पाळिसी विश्वासी | समस्त देवांसी | तूचि दाता || ९६ ||

समस्ता देवांसी | तूचि दाता होसी | मागो मी कवणासी | तुजवांचोनी || ९७ ||

तुजवाचोनी आता | असे कवण दाता | विश्वासी पोषिता | सर्वज्ञ तू || ९८ ||

सर्वज्ञाची खूण | असे हे लक्षण | समस्तांचे जाणे (= समस्तांचे भूत, वर्तमान, भविष्य जाणणे)| कवण ऐसा || ९९ ||

सर्वज्ञ म्हणोनि | वानिती पुराणी | माझे अंत:करणी | न ये साक्षी (=अनुभूती येत नाही) || १०० ||

कवण कैशापरी | असती भूमीवरी | जाणिजेचि तरी | सर्वज्ञ तो || १०१ ||

बाळक तान्हये | नेणे बापमाये | कृपा केवी होय | मातापित्या || १०२ ||

दिलियावांचोनि | न देववे म्हणोनि | असेल तुझे मनी | सांग मज || १०३ ||

समस्त महीतळी | तुम्हा दिल्हे बळी | त्याते हो पाताळी | बैसविले || १०४ ||

सुवर्णाची लंका | तुवा दिल्ही एका | तेणे पूर्वी लंका कवणा दिल्ही || १०५ ||

अढळ ध्रुवासी | दिल्हे हृषिकेशी | त्याने हो तुम्हासी काय दिल्हे || १०६ ||

नि:क्षत्र करूनी | विप्राते मेदिनी | देता तुम्हा कोणी | काय दिल्हे || १०७ ||

सृष्टीचा पोषक | तूचि देव एक | तूते मी मशक | काय देऊ || १०८ ||

नाही तुम्हा जरी | श्रीमंत नरहरी | लक्ष्मी तुझे घरी | नांदतसे || १०९ ||

याहोनी आम्हासी | तू काय मागसी | सांग हृषिकेशी | काय देऊ || ११० ||

मातेचे वोसंगी (=मांडीवर) | बैसोनिया बाळ वेगी | पसरी मुखसुरंगी | स्तनकांक्षेसी || १११ ||

बाळापासी माता | काय मागे ताता | ऐक श्रीगुरुनाथा | काय देऊ || ११२ ||

घेऊनिया देता | नाम नाही दाता | दयानिधि म्हणता | बोल दिसे || ११३ ||

देऊ न शकसी | म्हणे मी मानसी | चौदाही भुवनासी | तूचि दाता || ११४ ||

तुझे मनी पाही | वसे आणिक काही | सेवा केली नाही | म्हणोनिया || ११५ ||

सेवा घेवोनिया | देणे हे सामान्य | नाम नसे जाण | दातृत्वासी || ११६ ||

तळी बावी विहिरी | असती भूमीवरी | मेघ तो अंबरी | वर्षतसे || ११७ ||

मेघाची ही सेवा | न करिता स्वभावा | उदकपूर्ण सर्वा | केवी करी || ११८ ||

सेवा अपेक्षिता | बोल असे दाता | दयानिधि म्हणता | केवी साजे || ११९ ||

नेणे सेवा कैसी | स्थिर होय मानसी | माझे वंशोवंशी | तुझे दास || १२० ||

माझे पूर्वजवंशी | सेविले तुम्हांसी | संग्रह बहुवसी | तुझे चरणी || १२१ ||

बापाचे सेवेसी | पाळिती पुत्रासी | तेवी त्वा आम्हासी | प्रतिपाळावे || १२२ ||

माझे पूर्वधन | तुम्ही द्यावे ऋण | का बा नये करुणा | कृपासिंधु || १२३ ||

आमुचे आम्ही घेता | का बा नये चित्ता | मागेन मी सत्ता | घेईन आता || १२४ ||

आता मज जरी | न देसी नरहरी | जिंतोनि वेव्हारी | घेईन जाणा || १२५ ||

दिसतसे आता | कठिणता गुरुनाथा | दास मी अंकिता | सनातन || १२६ ||

आपुले समान | असेल कवण | तयासवे मन | कठिण कीजे || १२७ ||

कठीण की जे हरी | तुवा दैत्यांवरी | प्रह्लाद कैवारी | सेवकांसी || १२८ ||

सेवा बाळकासी | करू नये ऐसी | कठिणता परियेसी | बरवे न दिसे || १२९ ||

माझिया अपराधी | धरोनिया बुद्धि | अंत:करण क्रोधी | पहासी जरी || १३० ||

बाळक मातेसी | बोले निष्ठुरेसी | अज्ञाने मायेसी | मारी जरी || १३१ ||

माता त्या कुमारासी | कोप न धरी कैशी | आलिंगोनि हर्षी | संबोखी पा || १३२ ||

कवण्या अपराधेसी | न घालिसी आम्हासी | अहो हृषिकेशी | सांगा मज || १३३ ||

माता हो कोपासी | बोले बाळकासी | जावोनि पितयासी | सांगे बाळ || १३४ ||

माता कोपे जरी | एखादे अवसरी | पिता कृपा करी संबोखूनि || १३५ ||

तू माता तू पिता | कोपसी गुरुनाथा | सांगो कवणा आता | क्षमा करी || १३६ ||

तूचि स्वामी ऐसा | जगी झाला ठसा | दास तुझा भलतैसा | प्रतिपाळावा || १३७ ||

अनाथरक्षक | म्हणती तुज लोक | मी तुझा बाळक प्रतिपाळावे || १३८ ||

कृपाळु म्हणोनि | वानिती पुराणी | माझे बोल कानी | न घालिसीच || १३९ ||

नायकसी गुरुराणा | माझे करुणावचना | काय दुश्चितपणा | तुझा असे || १४० ||

माझे करुणावचन | न ऐकती तुझे कान | ऐकोनि पाषाण | विखुरतसे || १४१ ||

करुणा करी ऐसे | वानिती तुज पिसे | अजुनी तरी कैसे | कृपा न ये || १४२ ||

ऐसे नामांकित | विनविता त्वरित | कृपाळु श्रीगुरुनाथ | आले वेगी || १४३ ||

वत्सालागी धेनु | जैशी ये धावोनु | तैसे श्रीगुरु आपणु | आले जवळी || १४४ ||

येताचि गुरुमुनि | वंदी नामकरणी | मस्तक ठेवोनि | चरणयुग्मी || १४५ ||

केशव तो मोकळी | झाडी चरणधुळी | आनंदाश्रुजळी | अंघ्रि (= चरण, पाय) क्षाळी || १४६ ||

हृदयमंदिरात | बैसवोनि व्यक्त | पूजा उपचारित | षोडशविधि || १४७ ||

आनंदभरित | झाला नामांकित | हृदयी श्रीगुरुनाथ | स्थिरावला || १४८ ||

भक्तांच्या हृदयांत | राहे श्रीगुरुनाथ | संतोष बहुत | सरस्वतीसी || १४९ ||

|| इति श्रीगुरुचरित्रामृते परमकथाकल्पतरौ श्रीनृसिंहसरस्वत्युपाख्याने सिद्धनामधारकसंवादे मंगलाचरणं नाम प्रथमोSध्याय : ||

|| श्रीगुरुदत्तात्रेयार्पणमस्तु || श्रीगुरुदेवदत्त  ||

🪔 🌺 🙏 🪔 🌺 🙏 🪔 🌺 🙏 


अर्वाचीन भक्तलीलामृत-अध्याय ३१ वा

श्रीगणेशाय नमः ॥ जयजयाजी पंचकुंडा उपापती । जयजयाजी प्रतापज्योती । तुझें बालक मी निश्चिती । माझी उपेक्षा करूं नको ॥ १ ॥ कैलासपर्वत पर मरम्य । तें स्वां केले निवासधाम । प्रदोष कालीं पुरुषोत्तम । तुजलागीं ध्यातसे || || पूर्वी दक्षप्रजापती । तुज अवमानितां पशुपती । कोपोनि तूं निश्चितीं । वीरभद्र प्रकटविला || || स्वभक्तांचे करण्या रक्षण | दक्ष अससी तूं पार्वतीरमण । तो तूं मज दयाधन । कां उपेक्षिसी कळेना || || काय तुझ्या आले मनीं । कीं हा पातकी अज्ञानी । म्हणोनि हे शूलपाणी | पेटसी ना अनूनि मज || || परी व्याधाचे घनीं वृत्त । आणणे हे उमानाथ । मी लेकरूं तुझें सत्य | माझी उपेक्षा करूं नको || || असो ईश्वराचे भक्त निर्वाण | कोणत्याही जातींत पावीत जनन । ते

साक्षात् होती नारायण । तेथे शंका घेणे नको ॥ ७ ॥ जयांची मुळींच एक जाती । जैसी हृदयांत प्राणज्योती । किंवा जगांत एक विभूती । इर्श्वर जैसा साच कीं ॥ ८ ॥ मतें पंथाभिमान । यांतें न ज्यांच्या चित्ती स्थान ।

तेथे द्वैत कोठून । करी रिघाव सुज्ञ हो ।। ९ ।। पूर्वी कमाल कबीर ।

| होऊनि गेले भक्त थोर । त्यांचे जातीसी परमेश्वर । काय पाहता जाहला ||१०|| ईश्वर भावाचा भुकेला । हाचि आहे दुष्काळ त्याला । सद्भक्तीसी असे विकला | दयाघन पांडुरंग ||११|| कोणत्याही जातींत । बा कोणत्याही स्थितीत । निर्माण होवोत भगवद्भक्त । ते मिय हरीतें ||१२|| गंगेचिया दक्षिणेस | ग्राम एक चार कोस । शिरडी नाम विलसे त्यास । कोपरगांवासंनिध ||१३|| तथा शिरडी ग्रामासी । आले महाराज पुण्यराशी । बाबा साई जयांसी । म्हणती अवघे भक्तजन || १४ || तयांचा तो ठावठिकाण । न कळे करणा- लागून । चित्त आनंदमयपूर्ण | जयांचे ते सर्वदा ॥ १५॥ कोणीं जरी केला प्रश्न । कीं आपण आलांत कोठून । ठावठिकाण नामा- भिधान | काय सांगा आपुलें ||१६|| ऐसा प्रश्न होतां क्षणीं महाराज देती उत्तर झणीं । जेवीं मेघगर्जना etat गगनीं । धारा अवतरती भूवरी ||१७|| आम्हांसी नाही ठावठिकाण | आम्ही मुळींच निर्गुण । कर्मवशे पावूनि बंधन | पिंडामती पावलों ||१८|| या पिंडासी देह म्हणती । देहीं आमुचें नांव निश्चिती । विश्व चि गाव निगुती । आमुचें जाणा सर्वथा ||१९|| ब्रह्म आमुचा जनिता । माया आमुची माता । यायोगे ती साकारता । आम्ही पावलों शरीर है ||२०|| हेंचि तयांचे प्रत्युत्तर | लोकांचिये प्रश्नावर | जग अव नवर। भावना जयांची सर्वदा ||२१|| त्या महाराजे शिरडींत । चमत्कार केले अगणित | सकल वर्णावया येथ । नाहीं मती दासाने ||२२|| आधींच ले गांव लहान । त्यांतून थोडकी दुकान । तींही असती बहुत सान | हिंगबोजवार विक्रीचीं ||२३|| त्या दुकान- दारांपासीं । महाराज मागूनि तलासी । दीप लाविती मशीदीसी । तैसेचि देउळी अगणित ||२४|| ऐशापरी कित्येक वेळां । साईनीं दीपोत्सव केला । नित्य तेल देण्याला । वाणी अवधे कंटाळले ||२५|| दुकानदार अवधे जन । करिती विचार एकवटून रोज आणावें कोठून । तेल यति द्यावया ||२६|| ऐसा विचार करूनि मानसीं । महाराज येतां दुकानासी । खोटेंचि सांगती तयांसी । तेल नाही म्हणूनियां ॥ २७ ॥ ऐसें उत्तर ऐकताक्षणीं । बाबा aftaar गनीं । असत्य वदण्या वांलागुनी । कांहीं न वाटे अवघड ॥ २८ ॥ याचि हे बुडाले जन । दुरावला नारायण । पुढे हे पावती पतन । आपुलिया कर्मवशे ।। २९ ।। जो असत्य वदे वाणी । तो पातक्यांचा मुकुटमणी । तयांसी तो चक्रपाणी । न भेटे कदापि ॥ ३० ॥ सत्य वाक्य ज्याचेजवळ | तयासी विकला घननीळ । जपतपादि सकळ । सत्यापुढे बाबुर्डे ॥ ३१ ॥ सत्य पुण्याईचा घाट । सत्य ही ते सत्य मोक्षाची वाट । सत्य आनंदनदीचा घाट | न सोडावें ॥ ३२ ॥ वाण्यांसी न देतां प्रत्युत्तर | महाराज निघाले सत्वर । कृत्य केले अघटित थोर । अगाध लीला बाबांची ।। ३३ । मशीदीच्या सभोवार । पणत्या ठेविल्या मचुर | कांकडे घातले आंत थोर । कौतुके लोक पाहती ॥ ३४ ॥ जन परस्परें बोलती । तेलावीण कैसे लागती । दीप येथे निश्चितीं । वेडा पीर असे हा ।। ३५ ।। खडकी पेरणें वीजालागुन । अथवा वांझेचे वाळंतपण । करावया सुज्ञ जन । इच्छील काय कधीतरी || ३६ || हा वेड्यांचा शिखामणी । अज्ञान्यांचा अग्रगणी | दीप तेलावांचूनी | लावावया इच्छीत से ।। ३७ ।। तेल होतें टमरेलांत | लावण्यापुरते सांजवात | तें घेऊनि हातांत | गेले बाबा मशीदीसी ।। ३८ ।। तैं नानासाहेब. डेंगळे | लोकांसी बोलू लागले । तुम्हीं अंध झालां सगळे | उगी तयासी निंदूं नका ।। ३९ ।। कोणाची योग्यता कैशापरी । हें एक जाणे श्रीहरी । हिरा पडला जरी गारी । तरी कां गार मानावा ॥ ४० ॥

कांहीं वेळ बसा स्वस्थ । हा फकीर काय करितो येथ । तें पहा हो सावचित्त । वृथा घाई करूं नका ॥ ४१ ॥ ऐसे लोकांसी सांगितलें । डेंगळे मशीदीसी आले । मौनव्रत धारण केलें । चमत्कार पहावया ।। ४२ ।। तैं काय केलें महाराजांनीं । तेलांत घालूनि अर्धे पाणी । आत्मारामालागुनी | अर्पण केलें तेधवां ||४३|| तेलमिश्रित पाणी प्याले । मग निवळ पाणी घेतले | पणत्यांमार्जी ओतलें । स्नेहाऐवजीं तत्क्षणी ||४४ || काडी ओढूनि पेटविले | दीप बाबांनीं अवघे भले । चकित झाले डेंगळे । पाय धरले जावोनी ||४५|| दिवे जाळिले रात्रभर । लोक पाहती चमत्कार । केवढा बाबांचा अधिकार | प्रति- ईश्वर जन्मला ||४६ || शिरडीचे लोक मिळाले । साईपदी लीन झाले । म्हणती आम्ही अपराध केले । कोपूं नका आम्हांवरी ॥४७॥ आम्ही पोरें तुमचीं । तुम्हीं आहां माय साची । क्षमा करा अपराधांची । साईमहाराज कृपानिधी ||४८|| तुम्ही कृपेचे सागर । तुम्ही ज्ञान- नभींचे दिनकर । तुम्हीं सद्गुणांचे सरोवर | शांततेचे मेरु तुम्ही ॥ ४९ ॥ तेधवां बाबा अवघ्यांपती । बोलूं लागले निश्चितीं । तुम्ही ! ऐका रे माझी उक्ती । ये समयीं सावचितें ||५० || वर्तन ठेवा ऐशापरी । जेणें राजी राहील श्रीहरी । असत्य न वदावी वैखरी । सत्य सदा सांभाळावे ॥ ५१ ॥ घातपात कवणाचा । करूं नका कधींच सावा | धर्मकर्मी द्रव्याचा । व्यय करावा यथाशक्ती ॥५२॥ तरीच होईल कल्याण | अंतीं भेटेल नारायण । है माझे सत्य वचन | सदा वागवा मानसीं ।। ५३ ।। ते मानले अवघ्यांसी । वंदूनि - साई- चरणांसी । लोक गेले स्थानासी । अति आनंदें आपुल्या ॥५४॥ साई- महाराज योगाभ्यासी । किती वर्णावें तयांसी । त्यांच्या अगम्य लीलेसी । वर्णिता न ये पार कधीं ||१५|| है अखिल वर्तमान | चितांबर लागून | डेंगळ्यांनीं केलें कथन । तेही भाविक म्हणोनियां ।। ५६ ।। असे शय्या विचित्र बाबांची । एक फळी लांकडाची । रुंदी एक चीत साची । असे लांब चार हात || ५७ ॥ तीच त्यांचा स्पंदन | तीच त्यांचं अंथरुण । जीर्ण चिंध्यांनी बांधून । टांगिलीसे मशिदीत ॥ ५८ ॥ ती मशीर होती जीर्ण | किलच्याही गेल्या निघून । अगर्दी आढ्याचे सन्निधान । फळी टांगिली बाबांनी ॥५९॥ नुसतें वैसai तिच्यावरी । तन् होय धनूपरी । ऐशा विचित्र शय्येवरी । शयन करिती महाराज || ६० || फळीचे उभय बाजूंसी । म्हणजे उशापायथ्यासी । लावूनि दिवे पुण्यराशी । निजती योग. बळानें ॥ ६१ ॥ नुसता पाय ठेवितां बरी । जी तुटेल निर्धारीं । ऐसी तिची बळकटी खरी । काय वर्णन करावें ॥। ६२ || ते असत्य वाटे. feesia | म्हणून मुद्दाम रात्रीस | जाऊनि पाहती बाबांस | तो ते निद्रिस्त फळीवरी ।। ६३ ।। ही मौज पाहण्यापती | दाटी होऊ लागली अती । तेणें उपाधी निश्चितीं । होऊं लागली सर्वदा ॥ ६४ ॥ त्या फळीस म्हणूनी । तोडूनि टाकिलें एके दिनीं । मोकळे वासा- पासूनी । शीघ्र व्हावयाकारणे ॥ ६५ ॥ ख्याती झाली लोकांत बाबा साई महामहंत | नवसही अनंत । करूं लागले तयांप्रती ॥ ६६ ॥ शिरडी झाल महाक्षेत्र । वाराणसीसम पवित्र | बाबांमुळे सर्वत्र । नांव झाले वियेवें ॥ ६७ ॥ जैसें पुष्पयोग मृत्तिकेस । किंवा हिन्या- मुळे कोंदणास | वा सुवर्णामुळे विधीस | महत्त्व येते जैशापरी ॥ ६८ ॥ तैसें faster ariya | भूमंडळीं महत्र आले । खेड्याचें क्षेत्र बनले । थोर योग्यता साधूची ।। ६९ ।। असो एके समयासी । मंडळी आली बसी । तया शिरडी ग्रामासी | सिद्धदर्शन घ्यावया ॥ ७० ॥ चांदोरकर कुळभूषण | गोविंदात्मज नारायण | कलेक्टराचा चिटणीस जाण । नानासाहेब म्हणती जया ॥ ७१ ॥ दुजे रामदास हरिदास | वास जयांचा वाईस । तिसरे त्यांचे सोबतीस | होते बापू नगरकर ।। ७२ ।। कानगांवकर ते चौथे । ऐसे जमोनि आले तेथें । सिद्धदर्शन घ्यायातें। शिरडीग्राम श्रवण करा ॥ ७३ ॥ त्या रामदासी बुवासी । जाणे होतें दुसरे दिवशीं । हनुमंताच्या जयंतीसी । सीनातटीं नगरांत ।। ७४ ।। ते तळमळ करू लागले । म्हणती पाहिजे आतांचि गेलें । दर्शन घेणे पुरे झाले | चला गाडी आटोपा ।। ७५ ।। महाराज म्हणती चिटणीसासी । प्रथम करूनि भोजनासी । मग जानें वाटे मशीं । तुम्हीं नगराकारणें || ७६ || या ऐकोनि महाराजवचना । स्तब्ध झाले साहेब नाना । घेऊनि कानगांवकरांना | केली तयारी भोजनाची ॥ ७७ ॥ इकडे तो वाईकर । जावया झाला बहुत आतुर । म्हणे अहो बापू नगरकर | काय विचार करणे आतां ॥ ७८ ॥ माझी उद्यां आहे कथा | नगरामाजी तत्त्वतां । या वेड्याच्या नादा आतां । लागणे पुरे झालें || ७९ || चिटणीसाचें आहे ठीक | घरीं पैसा मुबलक । मला मागणे येईल भीक । लागतां नादी साईच्या ॥ ८० ॥ येथे न प्राप्ति कवडीची | चला वाट धरू स्टेशनाची गाडी पाहिजे आर्ताची । साधिली आपणां अवश्य ॥ ८१ ॥ ऐसें बोलून निघाले । उभयतां स्टेशनावरी आले । मार्गे शिरडीसी राहिले । mariant व चिटणीस ॥ ८२ ॥ महाराज म्हणती 

कॉ समुई- नारळाच्या झाडांचे बेट

कॉ समुई तुमच्या मनाला भुरळ घालणारे हे एक आगळे पर्यटन स्थळ आहे. स्थानिक लोक या बेटास नुसते समुई असेही म्हणतात. मोहून टाकणा-या या नारळाच्या बेटावर शुभ्र वाळूचे किनारे आहेत. चावेंग बीच (Chaweng Beach), लामाई बोफत (Lamai Bophut) आणि बिग बुद्धा (Big Buddha) ही कॉ समुईची काही आकर्षणे आहेत. कॉ समुई बेटावर स्क्युबा डायव्हिंग,  स्नॉर्केलिंग, विंड सर्फिंग, सर्फिंग, सेलिंग, वॉटर स्कीइंग,सी कयाकिंग, हाइकिंग, गोल्फ आणि टुरिंग अशा सर्व प्रकारच्या क्रीडाप्रकारांना वाव आहे. येथे तुम्ही कॉ ताव (Koh Tao) या आशियामधील टॉप डायव्हिंग डेस्टिनेशनला जाऊ शकता किंवा पौर्णिमेच्या पार्टीसाठी कॉ फंगन (Koh Phangan) येथे जाऊ शकता. येथे तुम्ही सिक्रेट बुद्धा गार्डनमध्ये जीप राइड घेऊ शकता किंवा येथील उष्ण कटिबंधीय अरण्यामध्ये एलिफंट राइड घेऊ शकता. संस्कृती आणि आकर्षणांचे बेट असणा-या कॉ समुईवर बिग बुद्धा मंदिर ते समुई झू पर्यंत सर्व प्रकारची आकर्षणे आहेत. दर वर्षी येथे १५ लाख पर्यटक भेट देतात.

१. परिचय 

स्थान, विस्तार व सीमा: 

स्थान:  कॉ समुई हे बेट थायलंडच्या क्रा इस्थ्मसच्या पूर्व दिशेकडे साऊथ चायना सीमधील गल्फ ऑफ थायलंडमध्ये आहे. 

विस्तार: कॉ समुईचे क्षेत्रफळ २२८.७ चौ. कि. मी. असून कॉ चॅग (Ko Chag) आणि फुकेतनंतर कॉ  समुई हे थायलंडमधील तिसरे सर्वांत मोठे बेट आहे. कॉ समुई थायलंडच्या सुरत थानी या प्रांतात येत असून त्याची लोकसंख्या फक्त ५५,००० आहे.

इतिहास: कॉ समुई बेटांवर पंधराव्या शतकामध्ये मले द्वीपकल्पावरून आणि दक्षिण चीनमधून आलेल्या मच्छीमारांची प्रथम वस्ती झाली असावी. चिनी नकाशांमध्ये कॉ समुईचा सर्वांत जुना उल्लेख १६८७ साली पुलो कॉर्नम (Pulo Cornam) या नावाने आढळतो.        

समुई नावाची व्युत्पत्ती: समुई या नावाची निश्चित व्युत्पती माहीत नाही. या बेटावर आढळणाऱ्या मुई (mui) नावाच्या वृक्षावरून किंवा मले भाषेतील सबोई (Saboey) या शब्दावरून समुई हे नाव पडले असावे.  मले भाषेमध्ये सबोई (Saboey) चा अर्थ ‘सुरक्षित ठिकाण’ असा  होतो. कॉचा अर्थ बेट असा आहे.

अर्थव्यवस्था: समुई बेटांची अर्थव्यवस्था मुख्यत: पर्यटन व्यवसायावर तसेच नारळ आणि रबर यांच्या निर्यातीवर अवलंबून आहे.

विसाव्या शतकापर्यंत कॉ समुईचा थायलंडच्या मुख्य भूमीशी फारसा संबंध नव्हता. १९७० सालापर्यंत बेटावर रस्तेसुद्धा नव्हते. बेटाच्या एका टोकापासून दुसऱ्या टोकापर्यंत जाण्यासाठी जंगलांनी व्यापलेल्या डोंगराळ भागामधून पूर्ण दिवस ट्रेकिंग करावे लागत असे. कॉ समुईवर आर्थिक सुधारणांमुळे समृद्धी आली असली तरी स्थानिक रहिवासी आणि स्थलांतरित यांच्यामध्ये वितुष्टही निर्माण झाले आहे.

हवामान: को समुईचे हवामान विषुववृत्तीय मॉन्सून प्रकारचे आहे. येथे आर्द्रता भरपूर आणि सरासरी तापमान २८ ﹾ सेल्सिअसच्या  आसपास असते. थंडी क्वचितच आढळून येईल. येथे जागतिक दर्जाच्या डायव्हिंग साइट्स आहेत आणि डायव्हिंगसाठी आदर्श परिस्थिती मार्च ते ऑगस्टदरम्यान असते. सर्वांत जास्त तापमान मार्च आणि एप्रिलदरम्यान (सरासरी ३० ﹾ) असते. सप्टेंबर ते नोव्हेंबरदरम्यान सर्वांत जास्त पाऊस पडतो. त्यामुळे थंड हवामान, कमी पाऊस, शांत समुद्र आणि मंद वारे, अशा सर्व अनुकूल गोष्टींसाठी डिसेंबर ते फेब्रुवारीदरम्यान जाणे उत्तम. को समुईचे हवामान पाहण्यासाठी  http://www.kosamui.com/weather.htm हे संकेतस्थळ पाहावे. 

२. प्रवास

प्रमुख शहरे /विभाग/बीचेस 

चावेंग (Chaweng) बीच: चावेंग हे को समुई बेटावरील सर्वांत मोठे आणि विकसित शहर आहे. हे बेट पूर्व किनार्‍यावर असून बनाना बोट रायडिंग, paरासेलिंग अशा विविध करमणुकीच्या प्रकारांसाठी लोकप्रिय आहे. पायी चालण्याच्या अंतरावर येथे तुम्हाला डाइव्ह शॉप्स, सूव्हनिर शॉप्स, इंटरनेट कॅफे, प्रवासी संस्थांची कार्यालये अशा सर्व सोयी आढळतील.    

लामाई बीच: येथील सुंदर किनारे, वाजवी दरातील हॉटेल्स यामुळे लामाई एके काळी बॅकपॅकर्सचे आवडते ठिकाण होते. परंतु आता हे ठिकाण दुसर्‍या क्रमांकावर गेले आहे. चावेंगपेक्षा हे ठिकाण थोडे निवांत आहे. परंतु अलिकडे येथेसुद्धा मोठ्या उद्योगांनी गुंतवणूक करून अलिशान रिझॉर्ट्स, कॅफे, रेस्तराँ काढली आहेत.   

बोफुत: समुईच्या उत्तर किनार्‍यावर बोफुत गाव आहे. याचे दोन भाग पडतात. एक भाग महणजे बोफुत बीच. हा बीच बिग बुद्धा आणि मैनाम बीचच्या मध्ये पसरलेला कित्येक किलोमीटर्सचा पट्टा आहे. दुसरा भाग म्हणजे बीचच्या मध्यभागी असणारे माच्छीमारांचे खेडेगाव. येथील जुनी चिनी लाकडी शॉपहाऊसेस लक्ष वेधून घेतात. येथे मच्छीमारांच्या होड्या सतत जा-ये करताना दिसतात.    


मैनाम बीच: चावेंग आणि बोफुतच्या उत्तरेकडे असणार्‍या या बीचचे वैशिष्ट्य म्हणजे येथील बारीक रेती आणि येथील सुंदर नारळाची झाडे. या बीचवर सर्व प्रकारचे बजेट असणार्‍यांची सोय होऊ शकते. येथे तुम्हाला राहण्यासाठे पंखा असणारी साधी खोली मिळेल तसेच पंचतारांकित पूल व्हिलासुद्धा मिळेल.  


को फा नान आणि को फा ताव: को फा नान हे बेट समुईच्या उत्तरेकडे आहे. येथील पौर्णिमेची पार्टी फार प्रसिद्ध आहे. को फा ताव टर्ट्ल आयलंड म्हणूनसुद्धा ओळखले जाते. दोन्ही ठिकाणे विषुववृत्तीय निसर्गसौंदर्य आणि सर्व आधुनिक सुखसोयींसाठी प्रसिद्ध आहेत.   


प्रमुख विभाग/रस्ते  

चावेंग वॉकिंग स्ट्रीट: हा येथील गजबजलेला रस्ता येथून घासाघीस करून सर्व प्रकारची खरेदी करण्यास चांगला. कपडे, सन ग्लासेस पासून सर्व प्रकारच्या वस्तू येथे मिळतील.   

मै नाम वॉकिंग स्ट्रीट: चावेंग वॉकिंग स्ट्रीटप्रमाणेच खरेदीसाठी चांगला रस्ता.  

प्रेक्षणीय स्थळे


बिग बुद्धा (बुद्धा बीच):

                                

बिग बुद्धा हे कॉ समुईचे सर्वांत मोठे आकर्षण आहे. कॉ समुईच्या नैऋत्य दिशेस,  समुई एअरपोर्टपासून सुमारे तीन किमी  अंतरावर कॉ फान (Koh Faan) या एका छोट्या खडकाळ बेटावर बिग बुद्धा मंदिर आहे. या मंदिरापर्यंत जाण्यासाठी मुख्य बेटापासून एक कॉजवे आहे.थाई भाषेमध्ये या मंदिरास वत फ्रा याई (Wat Phra Yai) असे म्हणतात. या मंदिरात बुद्धांची सोनेरी रंगाची १२ मीटर उंच मूर्ती असून ही मूर्ती १९७२ साली बनवण्यात आली. ही मूर्ती खूप दूरवरून दिसते. विमान आकाशात उड्डाण करताना किंवा जमिनीवर उतरताना देखील ही मूर्ती दिसते. रात्रीच्या वेळी दिव्यांच्या उजेडामध्ये या मूर्तीची शोभा वेगळीच दिसते. 


या मंदिरातील बैठ्या स्थितीतील बुद्धांची मूर्ती ‘मार’ या मुद्रेमध्ये आहे. या मुद्रेमध्ये बुद्धांनी डाव्या हाताचा पंजा डाव्या मांडीवर आकाशाकडे तोंड करून ठेवला आहे. उजवा हात मांडी घातलेल्या उजव्या गुडघ्यावर पालथा ठेवला असून त्याची बोटे जमिनीच्या दिशेने आहेत. ही मुद्रा म्हणजे बुदधांच्या आत्मज्ञानापर्यंतच्या प्रवासातील एक महत्त्वाची मुद्रा आहे. या मुद्रेमध्ये ध्यानस्थ आणि शांत राहुन बुद्धांनी ‘मार’ या राक्षसाने उत्पन्न केलेल्या मोह आणि इतर संकटांचा यशस्वीपणे प्रतिकार केला. ही मुद्रा चिकाटी, शुद्धता आणि आत्मोन्नतीचे प्रतीक आहे. बिग बुद्धा मंदिर हे केवळ पर्यटनस्थळ नसून बौद्ध धर्मीयांचे धार्मिक स्थळही आहे.


मूर्तीच्या पायथ्याशी विस्तीर्ण मोकळी जागा असून तेथे धार्मिक वस्तू, कपडे, सूव्हनिर्स वगैरेची दुकाने आहेत. येथे आणखी दोन बुदधमूर्ती आहेत. येथे खाद्यपदार्थांचे स्टॉल्स आणि उपाहारगृहेसुद्धा आहेत.



हिन ता आणि हिन याई किंवा ग्रँडमा ग्रँडपा रॉक्स (लामाई बीच): 

कॉ समुईच्या दक्षिण किना-यावरील हिन ता (Hin Ta) आणि हिन याई (Hin Yai) हा अजब खडकांचा प्रकार काही वर्षांपूर्वी स्थानिक लोकांना आढळून आला आणि आता तेथील आश्चर्यांमध्ये गणला जातो. सामान्यतः कला निसर्गाचे अनुकरण करते असे मानले जाते. परंतु निसर्ग सुद्धा कलाकृती निर्माण करू शकतो, हे ग्रँड मा (Ta) आणि ग्रँड पा (Yai) या खडकांच्या उदाहरणावरून दिसून येते. लामाई (Lamai) आणि हुआ थानोन (Hua Thanon) यांच्या मध्ये असणा-या खडकाळ समुद्रकिना-यावर असणारे पुरुष आणि स्त्रीच्या जननेंद्रियांचे आकार असणारे हे खडक पाहून पाहणा-यांच्या चेह-यावर अवघडलेले स्मितहास्य उमटते. 


वत Khunaram येथील ममी मंक: समुईमधील सर्वांत प्रसिद्ध भिक्खू Luang Pordaeng याच्या इच्छेप्रमाणे त्याचा मृतदेह येथे ममीच्या स्वरूपात ठेवला आहे. हा मृतदेह एका विशेष प्रकारे बनविलेल्या काचेच्या पेटीमध्ये ठेवला आहे. बरीच वर्षे उलटल्यामुळे या शवावर आता खराब होण्याच्या खुणा दिसत आहेत.


कुठे आहे : लामाई बीचच्या दक्षिणेकडे. कसे जावे: टॅक्सीने.  

ना मुअंग (Na Muang) वॉटरफॉल:                                                               

समुई बेटाच्या अंतर्भागात पुष्कळ धबधबे आहेत़. यांपैकी सर्वांत लोकप्रिय धबधबा आहे ना मुअंग फॉल्स. थाई भाषेमध्ये ना मुअंगचा अर्थ आहे जांभळा. या धबधब्याचे खडक जांभळे असल्यामुळे या धबधब्यास ना मुअंग असे नाव पडले आहे. ना मुअंग  फॉल्स समुई बेटाच्या दक्षिण शिखरांमध्ये असून दोन किना-यांच्या जवळ जवळ मध्यभागी आहे. फरसबंदी असलेल्या रस्त्याने हुआ थानोनला (Hua Thanon) जोडणा-या मुख्य रस्त्यापासून दूर जाऊन लामाईच्या (Lamai) दक्षिणेकडे नाथोनकडे (Nathon) जाता येते. येथे खरे़ तर दोन धबधबे आहेत. वरील बाजूस असणा-या धबधब्याकडे जाण्यास थोड्या ट्रेकिंगची, पायी जाण्याची किंवा हत्तीवरून जाण्याची आवश्यकता आहे. खालील बाजूस असणारा धबधबा ३० मीटर उंचीवर असून येथे पाणी मोठ्या खडकावरून खाली असणा-या मोठ्या तळ्यामध्ये येते. या तळ्यामध्ये लोक अंघोळ करीत असतात. धबधब्याकडे जाणा-या रस्त्याच्या दोन्ही बाजूस तुम्हाला सूव्हनिर्स तसेच थाई पदार्थांचे स्टॉल्स मिळतील. पार्किंग लॉटच्या दोन्ही बाजूस तुम्हाला हत्ती दिसून येतील. या हत्तींवर बसून तुम्ही इतर धबधबे पाहण्यास 

समुई बेटाच्या अंतर्भागात पुष्कळ धबधबे आहेत़. यांपैकी सर्वांत लोकप्रिय धबधबा आहे ना मुअंग फॉल्स. थाई भाषेमध्ये ना मुअंगचा अर्थ आहे जांभळा. या धबधब्याचे खडक जांभळे असल्यामुळे या धबधब्यास ना मुअंग असे नाव पडले आहे. ना मुअंग  फॉल्स समुई बेटाच्या दक्षिण शिखरांमध्ये असून दोन किना-यांच्या जवळ जवळ मध्यभागी आहे. फरसबंदी असलेल्या रस्त्याने हुआ थानोनला (Hua Thanon) जोडणा-या मुख्य रस्त्यापासून दूर जाऊन लामाईच्या (Lamai) दक्षिणेकडे नाथोनकडे (Nathon) जाता येते. येथे खरे़ तर दोन धबधबे आहेत. वरील बाजूस असणा-या धबधब्याकडे जाण्यास थोड्या ट्रेकिंगची, पायी जाण्याची किंवा हत्तीवरून जाण्याची आवश्यकता आहे. खालील बाजूस असणारा धबधबा ३० मीटर उंचीवर असून येथे पाणी मोठ्या खडकावरून खाली असणा-या मोठ्या तळ्यामध्ये येते. या तळ्यामध्ये लोक अंघोळ करीत असतात. धबधब्याकडे जाणा-या रस्त्याच्या दोन्ही बाजूस तुम्हाला सूव्हनिर्स तसेच थाई पदार्थांचे स्टॉल्स मिळतील. पार्किंग लॉटच्या दोन्ही बाजूस तुम्हाला हत्ती दिसून येतील. या हत्तींवर बसून तुम्ही इतर धबधबे पाहण्यास जाऊ शकता किंवा आणखी अंतर्भागात फिरू शकता. 


कुठे आहे: नॅथन बीच. कसे जावे: टॅक्सीने    

अंग थाँग (Ang Thong) नॅशनल मरीन पार्क:

अंग थोंग नॅशनल मरीन पार्कची स्थापना १२ नोव्हेंबर १९८० मध्ये झाली. हा जवळ जवळ ४२ बेटांचा समूह दक्षिण थायलंडच्या सेंट्रल गल्फ कोस्टमध्ये कॉ समुईच्या वायव्य दिशेस आहे. या मरीन पार्कचे एकूण क्षेत्रफळ १०२ चौ. किमी असून त्यापैकी जमिनीचे क्षेत्रफळ फक्त १८ चौ. किमी आहे. मरीन पार्कच्या क्षेत्रामध्ये संपूर्ण बेटांची साखळी समाविष्ट होत नाही. मरीन पार्कच्या क्षेत्रामध्ये बेटांचा ८२% भाग समाविष्ट होतो. बेटांच्या बहुतेक सर्व भागामध्ये ४०० मीटर उंचीचे १० चुनखडीचे पर्वत आहेत. चुनखडीचे आकार रासायनिक प्रक्रिया आणि हवामानामुळे बदलत राहतात. त्यामुळे बेटांवर निरनिराळ्या विचित्र दिसणा-या गुहा आणि कडे तयार झाल्या आहेत. 

अंग थोंग मरीन पार्कच्या हवामानावर मॉन्सूनचा प्रभाव आहे. त्यामुळे येथे पाऊस भरपूर, म्हणजे २,००० मिमी इतका पडतो. पाऊस पडतो तेव्हा फार मोठ्या लाटा उसळतात आणि वादळेही होतात. येथील तापमान साधारणत: २३ﹾ असते. त्यामुळे येथे भेट देण्यासाठी योग्य काल म्हणजे फेब्रुवारी ते एप्रिल दरम्यान आहे. नोव्हेंबर ते डिसेंबर या काळामध्ये गल्फ ऑफ थायलंडमध्ये मोठमोठ्या लाटा उसळतात आणि वादळे होतात. त्यामुळे या काळातील प्रवास सुरक्षित नसतो. नोव्हेंबर आणि डिसेंबर दरम्यान मरीन पार्कचे कार्यालय बंद ठेवतात. 

स्वच्छ आणि सुंदर बीचेस असणारा हा मरीन पार्क डाइव्हिंग करणा-यांसाठी नंदनवन आहे. येथे सुमारे ४२ अरण्याच्छादित बेटे आहेत. को समुईवरून सी कॅनो किंवा सी कयाकिंग ट्रिप्स काढून या बेटांवरील अद्भुत वन्यजीवनाचा तुम्ही अनुभव घेऊ शकता. येथील प्रचंड खडक, खडकांआड लपलेल्या गुहा, येथील लगून्स पाहणे म्हणजे वेगळाच रोमांचकारी अनुभव आहे. को वाव(Koh Wao) किंवा हिन होपोन (Hin Hoppon) स्क्युबा डाइव्हिंग आणि स्नॉर्केलिंगसाठी योग्य आहे. को मै (Ko Mae) किंवा आयलंड मदरचा टेकड्यांचा भाग चढून गेले असता टेकड़्यांच्या प्रदेशामध्ये एमरल्ड लेक नावाचे अद्भुतरम्य सरोवर पाहण्यास मिळेल. 

समुई अक्वेरिअम विथ टायगर शो:अक्वेरिअम आणि झू, दोन्हीमध्ये थायलंडच्या विषुववृत्तीय वातावरणातील भूचर आणि जलचर पाहावयास मिळतील. अक्वेरिअममध्ये कॉरल फिश, प्रचंड कॅट फिश, शार्क असे जलचर पाहावयास मिळतील. अक्वेरिअमला लागूनच झू असून त्यामध्ये आग्नेय आशियातील, वाघ, पोपट, हॉर्नबिल, सागरी ससाणे, गरुड, पाणकोंबडे, असे अनेक प्रकारचे पशुपक्षी पाहावयास मिळतील.      

सिक्रेट बुद्धा गार्डन किंवा वत चालोंग : हे मंदिर लुअंग फो चॅम (Luang Pho Cham) आणि लुअंग फो चुअंग (Luang Pho Chuang) या दोन भिक्खूंच्या स्मरणार्थ बांधले आहे. हे भिक्खू आपल्याकडील वन्यौषधींनी लोकांवर उपचार करीत. १८७६ साली झालेल्या खाणकामगारांच्या बंडामध्ये त्यांनी बऱ्याच खाणकामगारांवर उपचार केले होते.    

ठिकाण: समुई हिल्सवर.

उपक्रम

अँग थॉंग मरीन पार्कमधील सी सफारी: 

को ताव आणि नांग युआन (Nang Yuan) बेटांचा स्पीड बोटीने प्रवास:

इको सफारी: 

समुई सफारी:  

निशाजीवन 

लेडी बॉइज कॅबरे शो: 

ठिकाण: चावेंग बीच  

दिवस १   

कॉ समुईला आगमन.

स्थळदर्शन:- बिग बुद्धा, ग्रँडमा – ग्रँडपा रॉक्स, नामुअंग वॉटरफॉल.

नॅथन शहरास भेट देणे.     

दिवस २ 

बोटीने अंग थॉम्ग नॅशनल मरीन पार्क आणि  मै   कॉ  आयलंडला  भेट  देणे .

कॉ समुईला कसे जावे: कॉ समुईला जाण्यासाठी बँकॉकहून बँकॉक एअरवेजच्या थेट फ्लाइट्स् आहेत. बँकॉकहून विमानाने कॉ समुई तासाभराच्या अंतरावर आहे. याशिवाय कॉ समुईला जाण्यासाठी फुकेत, क्रॅबी आणि सिंगापूरहूनसुद्धा थेट फ्लाइट्स् आहेत. चिअंग माय ते कॉ समुई या विमानप्रवासास साधारणत: पावणेदोन तास लागतात.

समुई एअरपोर्ट 

समुई एअरपोर्ट द्वीपाच्या उत्तर भागामध्ये बो फुत (Bo Phut) बीचच्या जवळ आहे. समुई एअरपोर्ट हा अतिशय सुंदर आणि उत्कृष्ट पद्धतीने बांधलेला विमानतळ आहे. या विमानतळाचे आणखी एक वैशिष्ट्य म्हणजे त्याला लाभलेली अतिशय निसर्गरम्य पार्श्वभूमी. समुई एअरपोर्ट हा बँकॉक एअरवेजच्या खाजगी मालकीचा विमानतळ असून त्याचे व्यवस्थापन बँकॉक एअरवेजकडेच आहे. बँकॉक एअरवेज हा थायलंडमधील खाजगी मालकीचा सर्वांत मोठा कॅरिअर आहे. बँकॉकच्या सुवर्णभूमी एअरपोर्टनंतर येत्या एक दोन वर्षांमध्ये समुई एअरपोर्ट दुस-या क्रमांकाचे आंतरराष्ट्रीय हब बनवण्याची बँकॉक एअरवेजची योजना आहे.

ना मुअंग सफारी पार्क:                                                                  http://namuangsafarisamui.com/                                                                  

नमुअंग वॉटर फॉल्सच्या अॅक्सेस रोडने आणखी खाली आले असता नमुअंग सफारी पार्कला जाता येते. एलिफंट राइड्स, मंकी शोज ही या सफारीची काही वैशिष्ट्ये आहेत. 

नाथोन टाऊन:

थायलंडच्या मुख्यभूमीवरून समुईला बोटीने आले असता बोट नाथोन या गावात येते. नाथोन टाऊन हे समुई बेटाचे प्रशासकीय केंद्र असले तरी फार पूर्वीच लोकवस्तीचे केंद्र म्हणून त्याचे महत्त्व संपुष्टात आले. त्यामुळे तुम्ही जर बोटीने येणार नसाल तर नाथोन टाऊनला येण्याचे खास काही कारण नाही. नाथोन हे समुई बेटावरील मच्छीमारांचे केंद्र आहे. येथून बेटावरील उपाहारगृहांना मासळीचा पुरवठा होतो. शहराच्या किना-यावरील धक्क्यांस या मच्छीमारांच्या बोटी बांधलेल्या असतात. सकाळच्या वेळी या बोटी जास्त दिसून येतात.

सनसेट हाऊस: नाथोन समुद्रकिना-यावर सनसेट हाऊस नावाचे रेस्तराँ आहे. या रेस्तराँमध्ये बसून संध्याकाळी सीफूडचा आस्वाद घेत सूर्यास्ताचे सुंदर दृश्य पाहता येते.

नाथोन शहराच्या समुद्रकिना-यावरील धक्क्यावरून अंगथाँग (Angthong) नॅशनल मरीन पार्कला ट्रिप जातात.  हे टूर ऑपरेटर्स तुम्हाला हॉटेलमधून पिक करून पुन्हा हॉटेलमध्ये सोडतात.


नाथोन शहरामधील खरेदी: 

नाथोन शहर समुईचे प्रशासकीय केंद्र असल्यामुळे स्थानिक लोक स्वस्तामध्ये खरेदी करण्यासाठी येथे येतात. येथे मुख्यत: रेशमी वस्तू, पादत्राणे यांची दुकाने आहेत.

. परिशिष्टे 

BEST LUXURY HOTELS

1. Banyan Tree, Samui, Lamai

2. Intercontinental Samui Baan Taling Ngam

3. Vana Belle a Luxury Collection Resort

BEST BOUTIQUE HOTELS

1. Zazen Boutique Resort and  Spa, Bophut Beach 

2. Mae Samui Beach Resort, Laem Yai Bay

3. Pavilion Samui Boutique Resort, Lamai Beach

BEST BEACH RESORTS

1. Hansar Samui Resort, Bophut Beach

2. Muang Samui Spa Resort, Chaweng Beach

3. Sareeraya Villas & Suites, Chaweng Beach

BEST FAMILY HOTELS

1. Anantara Lawana Resort & Spa, Chaweng

2. New Star Beach Resort, Chaweng Noi

3. Chaba Cabana Beach Resort & Spa, Chawang

BEST RSETAURANTS

1. Barracuda Restaurant 

2. Café 69

3. The Boudoir

4. Stacked

5. Tree Tops

6. Kob Thai

7. 9Gems Lounge Rsetaurant

8. Dining on the rocks

WHERE TO GO FOR NIGHT LIFE

1. Soi Green Mango

2. Soi Reggae

3. Lamai Central Plaza

4. Ko Pha Ngan full moon party

5. Ladyboy Cabaret shows

6. Swing Bar

7. Thai Boxing (Muay Thai)

8. Q Bar


WHERE TO SHOP 

1. Central Festival Samui

2. Samui Hot Club

3. Buddy Oriental Plaza. Location: Lamai Beach

4. Bophut Plaza 

5. Lamai Night Plaza

6. Chaweng Fashion Shopping


को समुईपासून भेट देता येण्यासारखे    आणखी काही प्रदेश

सुरत थानी (जिल्हा):


लेम साई (Laem Sai) बीच, सुरत थानी:  

 या बीचवर सर्वत्र वाळू आणि गोटे आढळून येतील. समुद्रातून मासे आणि  लॉब्स्टर्स पकडणे हा येथील लोकांचा मुख्य व्यवसाय आहे. 








Leave this lotus of water

जळकमळा सोडुनि जा बाळा
स्वामी माझे उठतिल आता
माथी माझ्या  बालकहत्या
येइल  त्यांनी तुला मारता 

O lovely child, leave this water-lotus
My master  will rise now
When he kills you
The infanticide will come to my head

China Trip

  DAY 1 - Australia (or New Zealand) – Beijing, China May 22 Australia (or New Zealand) – Beijing, China Today, you'll depart to Beijing...