शैतान लोगों का मुकाबला कैसे करें
'कोई आदमी इस तरह कैसे बर्ताव कर सकता है?' क्या ऐसा खयाल कभी किसी व्यक्ति को देखकर आप के मन में आया हैं?
आपने समाज में ऐसे व्यक्ति को देखा होगा या ऐसे व्यक्ति के बारे में पढ़ा या सुना होगा। ऐसा व्यक्ति पुरुष, महिला, छोटा लड़का, लड़की कोई भी हो सकता है। हो सकता है कि यह व्यक्ति सोश्योपाथ हो।
डॉ. मार्था स्टाउट (Dr Martha Stout) इस लेखिका ने अपनी पुस्तक Outsmarting the Sociopath next door (आउटस्मार्टिंग द सोशियोपैथ नेक्स्ट डोर) में ऐसे व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला है।
मनोरोगी, पागल, विक्षिप्त, आधे-अधूरे ये सभी वर्णन किसी सोश्योपाथ का वर्णन करने के लिए अपर्याप्त हैं। क्योंकि मनोरोगी व्यक्तियों के गलत व्यवहार का कोई न कोई कारण होता है, इसलिए उनमें सुधार की कुछ गुंजाइश होती है। लेकिन सोश्योपाथ के साथ ऐसी कोई संभावना नहीं है। केवल एक चीज जिसकी आप आशा कर सकते हैं वह यह है कि आपको कहीं भी कोई सोश्योपाथ न मिले। लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि कभी न कभी, कहीं न कहीं, कोई सोश्योपाथ आपके जीवन में आ ही जाता है। कभी कभी सोश्योपाथ आपके घर का कोई व्यक्ति हो सकता है। हिंदी में ऐसे व्यक्ति को विकृत व्यक्ति ही कहा जा सकता है. लेकिन सोश्योपाथ का वर्णन करने के लिए कोई सटीक पर्यायवाची नहीं है। इसीलिए मैं यहां सोशियोपैथ शब्द का उपयोग करता हूं। हमारे हाथ में एकमात्र चीज स्वयं को सोश्योपाथ से बचाना है।
१. मानस में छेद:-(A hole in the Psyche):-
सोश्योपाथ की मानसिकता बहुत ही दोषपूर्ण होती है।
टॉम और जैक अपनी कार चलाते हैं और आमने-सामने आते हैं। टॉम गलती करता है और गलत लेन में पहुँच जाता है। टॉम को बचाने के लिए जैक सड़क से हट जाता है और जैक की कार कीचड़ में फंस जाती है। जैक ने अच्छे कपड़े पहने हैं और अपनी प्रेमिका से मिलने जा रहा है। जैक गुस्से में है. वह सीधी पिस्तौल निकालता है और टॉम को गोली मार देता है।
एक सोश्योपाथ में विवेक का अभाव होता है। यदि आपने कभी गलती से कुछ बुरा किया है, तो आपको विवेक की चुभन अवश्य होगी। लेकिन एक सोश्योपाथ को ऐसा कभी महसूस नहीं होगा। दूसरी बात यह है कि उन्हें दूसरों को पीड़ित देखकर आनंद आता है। क्या ये लोग हत्यारे हैं? एक हत्यारा सोश्योपाथ हो सकता है, लेकिन सभी सोश्योपाथ हत्यारे नहीं होते। ऐसे लोगों को जेल में होना चाहिए. लेकिन कानून उन्हें पकड़ नहीं पाता. इसके विपरीत ये लोग समाज में ऊंचे पदों पर भी पाए जाते हैं।
२. जब कोई सोश्योपाथ आपके घर का कोई व्यक्ति हो (When the Sociopath belongs to you):
एक घटना में, एक बारह वर्षीय लड़के ने अपनी छह वर्षीय बहन के साथ बलात्कार किया। दूसरी घटना कुछ ऐसी हैं | एक मां ने अपनी दो साल की बेटी को सीढ़ी में जाने से रोकने के लिए सीढ़ियों के एन्ट्रन्स में छोटा सा गेट बनवा दिया। मां कुछ काम करने के लिए लॉन्ड्री में गई, तभी उसने अपनी बेटी के चिल्लाने की आवाज सुनी। जब वह बाहर आई तो उसकी बेटी सीढ़ियों से गिरकर मर गई थी। उसका बड़ा बेटा सामने खड़ा देख रहा था। उस के मुताबिक उसे पता ही नहीं चला कि ये कैसे हुआ. शायद उस बेटी ने गेट खोलना सीख लिया होगा, ऐसा बेटे का कहना था |
इन सभी में एक बात समान थी और वह थी विवेक की कमी। उन बच्चों में उन के द्वारा कुछ भी गलत करने का अहसास ही दिखाई नहीं दे रहा था। फिर ऐसे बच्चे यह दिखाने में बहुत माहीर होते हैं कि वे कितने मासूम हैं और दूसरों की मानसिक कमजोरी का फायदा उठाना वह अच्छी तरह से जाते हैं।
इस का फिलहाल कोई समाधान नहीं है. ऐसे बच्चों को प्रशिक्षण कार्यक्रम में भेजने से भी उनमें सुधार नहीं होता। Kazdin model के नाम से जाना एक प्रशिक्षण कार्यक्रम है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम बच्चे के लिये किसी मनोवैज्ञानिक की सलाह से कर सकते हैं।
आपको अपने अच्छे बच्चे पर विश्वास करना होगा जो इस सोशियोपैथिक भाई-बहन से पीड़ित है। कानूनी सलाह की भी तैयार करनी चाहिए. क्योंकि अगर ऐसे बच्चे ड्रग्स लेकर जाने लगे तो पुलिस आपके पीछे पड़ सकती है.
३. कार्यालय में दुष्ट प्रवृत्तियाँ (Human evil at work):
सोश्योपाथिक बॉस:ग्रेस ने उन ई-मेल का उत्तर देने का काम किया जो उसकी बॉस एंजेला ने उसे बताया था । लेकिन एंजेला ने कहा कि यह वह काम नहीं है जो उसने कहा था। वह ग्रेस को यह कहकर डांटती है कि उसे बेहतर सुनना सीखना होगा और ग्रेस को यह याद दिलाने के लिए एक नारंगी बैंड ग्रेस की कलाई पर बांध देती है ताकि जब ग्रेस वह बैंड देखे, उसे याद आना चाहिए कि उसे कच्छी तरह से सुनांना हैं | ग्रेस को बहुत अपमानित महसूस हुआ. लेकिन वह कुछ नहीं कर सकी.
कई लोगों को बॉस के साथ ऐसा अनुभव हुआ है. ऐसे में यदि संभव हो तो नौकरी बदल लेना ही बेहतर है। यदि यह संभव नहीं है, तो बॉस ने समय समय पर किस तरह परेशान किया इस का तिथिवार विवरण लिखना ठीक होगा | जब सीनिअर मॅनेजमेंट के साथ चर्चा का समय आता है तो यह विवरण उपयोगी हो सकता है।
सोशियोपैथिक प्रोफेशनल :
जिन्हों ने समाज की मदद करनी चाहिए ऐसे प्रोफेशनल लोग, जैसे कि डॉक्टर, शिक्षक, वकील, सोश्योपाथ होना बहुत दु:खदायक हैं । ऐसे प्रोफेशनल्स को प्रमाणित करनेवाला बोर्ड होता है। अदालत जाना बहुत महंगा और समय लेने वाला है। इसके बजाय इस बोर्ड से शिकायत करें.
४. सोश्योपाथ के साथ अदालती लड़ाई( The Sociopath in Court):
ध्यान रखें कि सोश्योपाथ के विरुद्ध अदालती लड़ाई बहुत कठिन होने वाली है। क्योंकि हमारी न्यायपालिका कानून को बनाए रखने के लिए है। इस न्याय व्यवस्था में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि किसी सोश्योपाथ को क्या सज़ा दी जाए। सोश्योपाथ चाहे कितना भी विकृत क्यों न हो, वह एक बात बहुत अच्छी तरह से जानता है कि वह कमजोर लोगों को कैसे शिकार बनाया जाए | वह यह दिखाने में कुशल है कि वह बहुत अच्छा है। उसका कोई विवेक नहीं है. इसलिए यह साबित करने के बजाय कि कोई व्यक्ति सोश्योपाथ है, उसके गलत और हिंसक व्यवहार को साबित करने का प्रयास करें। इसके लिए उचित रिकॉर्ड रखें। अपने बेटे या बेटी की कानूनी अभिरक्षा की मांग करते समय आपको अदालत में अपने जोडीदार का सामना करना पडता है जो सोश्योपाथिक हैं । भले ही तलाक हो गया हो और आपको बेटे या बेटी की कस्टडी मिल गई हो, अदालत तुम्हारे जोडीदार के बेटे या बेटी से मिलने के अधिकार को मान्यता देती है। तभी यह सोशियोपैथिक जोडीदार राजारोस आपके घर आता है और बेटे या बेटी को आपके खिलाफ भड़काने की कोशिश करता है। आप का मानसिक संतुलन बिगाड़ने का प्रयास करता है । यहां एक बात ध्यान दें, आपका मानसिक असंतुलन ही उसकी जीत है। उस की कोशिश की तरह आपको लापरवाही दिखाना चाहिए, उसकी उपेक्षा करनी चाहिए | इस से वह अपना मानसिक संतुलन खो बैठेगा | यह उस की हार होगी और आपकी जीत |आज के इंटरनेट युग में सोशियोपैथ की राक्षसी शक्ति ने जो एक और हथियार हासिल किया है, वह है साइबर हमले। यह हानिरहित लगनेवाला हमला वास्तव में भयावह हो सकता है और एक निर्दोष व्यक्ति की आत्महत्या का कारण बन सकता है। क्योंकि एक सोश्योपाथ लगातार आपत्तिजनक संदेश भेजकर किसी व्यक्ति का जीवन कठिन बना सकता है।
हम उम्मीद करते हैं कि एक राक्षस एक राक्षस जैसा दिखे। लेकिन सोश्योपाथ मासूम दिखने में माहीर होता हैं। एक सोश्योपाथ की निर्दोष छवि अदालत में जूरी को प्रभावित कर सकती है। साइबर हमलों की स्थिति में सुरक्षा सेटिंग्स को और अधिक सुरक्षित बनाया जा सकता है।
६. सोश्योपाथ से कैसे निपटे (Transcending the sociopath's effects):
६.१-समझें कि आप किस प्रकार के व्यक्ति के साथ काम कर रहे हैं।
६.२-याद रखें आपका पक्ष अच्छाई पर आधारित है। अपना लक्ष्य निर्धारित करें.
६.३-गेम बदलें. जैसे, एक सोश्यौपाथ आपके बच्चों का कब्ज़ा करने की कोशिश कर रहा है। आप बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे ।
६.४-अपने लक्ष्य पर ध्यान दें.
६.५- सोश्योपाथ को वह न मिलने दें जो वह चाहता है। सोश्योपाथ आपको परेशान करने में आनंद लेता है। आप शांत रहें.
६.६- ऐसे अन्य लोग भी होंगे जो उस सोश्योपाथ से पीड़ित होंगे। उनकी मदद लें.
६-७. ध्यान दें, आपने अभी जो लक्ष्य निर्धारित किया है वह आपके जीवन का केवल एक हिस्सा है, संपूर्ण जीवन नहीं।
६-८. सोश्योपाथ के विषय में दूसरे लोगों में ज्यादा चर्चा न करें. हो सकता है कि आपकी समस्या दूसरों को आपकी जितनी महत्वपूर्ण न लगे।
६-९. अपनी सेहत का ख्याल रखना।
७. सोश्योपाथ या नार्सिसिस्ट (Sociopath or Narcissist)
नार्सिसस ग्रीक पौराणिक कथाओं का एक पात्र है। नार्सिसस दिखने में बहुत खूबसुरत था। एक बार उसने पानी में अपना प्रतिबिंब देखा और उसे खुद से प्यार हो गया और अपने ही प्यार में चैन खोकर उस का अंत हो गया ।
नार्सिसिस्ट व्यक्ति वह व्यक्ति होता है जो स्वयं के प्यार में डूबा रहता है। नार्सिसिस्ट का व्यक्तित्व हमें सोश्योपाथ की तरह उलझन में डालता है। हालाँकि दोनों के बीच कई समानताएँ हैं, लेकिन बुनियादी अंतर भी हैं। सोश्योपाथ के पास कोई विवेक नहीं होता, जबकि नार्सिसिस्ट के पास विवेक तो होता है, लेकिन दूसरे को समझने की वृत्ति नहीं होती। सोश्योपाथ सत्ता का भूखा होता है जबकि नार्सिसिस्ट प्रशंसा का भूखा होता है। तकनीकी रूप से सोश्योपाथ नार्सिसिस्ट होता है लेकिन नार्सिसिस्ट सोश्योपाथ हो ऐसा ज़रुरी नहीं है।
८. संस्थागत स्तर पर सोशियोपैथी (Sociopathy at the institutional level):-
क्या संगठन सोश्योपथिक हो सकते हैं? क्या कोई व्यक्ति जो परिवार से प्रेम करता हैं, परिवार के प्रति ज़िम्मेदारियां निभाता हैं, वह एक संस्था की शीर्षस्थ व्यक्ति होने पर दूसरों के अधिकारों पर अतिक्रमण कर सकता है? दुर्भाग्य से, इस प्रश्न का उत्तर 'हां' है। ऐसे संस्थाओं में वे कंपनियाँ शामिल हैं जो मुनाफाखोरी के साथ-साथ दमनकारी शासन के तरीके अपनाती हैं।९. सत्प्रवृत्ति (The nature of good):-
एक जगह एक मोटा लड़का रहने आया। उस के मोटापे के कारण सभी बच्चे उसे चिढ़ाते थे। एक बार इन बच्चों ने इस मोटे लड़के को कीचड़ में धकेल दिया । एक लड़की ने ये देखा और बर्दाश्त नहीं कर पाई. उसने इन व्रात्य बालकों से स्पष्टीकरण मांगा । बच्चे कुछ नहीं बोले. लेकिन फिर कभी उन्होंने उस मोटे लड़के को परेशान नहीं किया।
यही सत्प्रवृत्ति या अच्छा रवैया है. बुरी सोच वाले लोग जैसे अपना स्वभाव नहीं छोड़ते, ठीक वैसे ही अच्छी सोच वाले लोग अपना स्वभाव नहीं छोड़ते। यहीं पर आशा के लिये जगह है.
सोशियोपैथी विकृति का एक रूप है। वर्तमान में सोशियोपैथी का कोई चिकित्सीय इलाज नहीं है। शायद न्यूरोलॉजी अंततः इसका समाधान ढूंढ लेगा। तब तक जीवन के किसी न किसी क्षेत्र में सोश्योपाथिक लोगों से मिलना होता रहेगा। उनसे बचना या उन्हें नज़रअंदाज़ करना कोई समाधान नहीं है। इसलिए उन पर काबू पाना ही होगा.
लेखिका के बारे में :
पुस्तक की लेखिका डाॅ. मार्था स्टाउट ने पच्चीस वर्षों तक हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के मनोचिकित्सा विभाग में मनोविज्ञान फॅकल्टी की तौर पे काम किया है। उन्होंने बोस्टन में मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल में क्लिनिकल एसोसिएट के रूप में भी काम किया है। उन्हों ने क्लिनिकल सायकॉलजिस्ट के तौर पर स्वतंत्र प्रॅक्टिस की है मानसशास्त्रीय आघात (trauma) और PTSD इन क्षेत्रों में उन्हों ने विशेष काम किया हैं । उन्होंने कई स्कूलों और कॉलेजों में डिग्री लेव्हल पर मनोविज्ञान पढ़ाया है।
समीक्षा:
लेखक डॉ. मार्था स्काउट मनोविज्ञान विषय की विशेषज्ञ हैं और उन्होंने अपना संपूर्ण अनुभव इस पुस्तक में सरल भाषा में पाठकों के लिए उपलब्ध कराया है। उन्होंने मनोविज्ञान की जटिल अवधारणाओं को सरल शब्दों में समझाया है। सोश्योपाथ के व्यक्तित्व की विस्तार से व्याख्या करते हुए उन्हों ने बताया है कि ऐसे व्यक्तित्व से स्वयं को कैसे बचाया जा सकता है। पुस्तक में उद्धृत लिये हुए प्रभावित लोगों के पत्र, विभिन्न पुस्तकों के उद्धरण सभी लेखिका द्वारा पुस्तक लिखने के लिए किए गए महान प्रयास को दर्शाते हैं। यह पुस्तक सोश्योपाथ व्यक्तित्व को समझने और उस पर काबू पाने में एक मील का पत्थर है।
पुस्तक के बारे में :
पुस्तक का नाम : Outsmarting the Sociopath next door.