Wednesday, May 22, 2024

हिंदी भाषांतर

 हिंदी भाषांतर 






ज्ञानपीठ पारितोषिक विजेते स्व. कविवर्य कुसुमाग्रज 

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अनामिकास 

अनामवीरा, जिथे जाहला तुझा जीवनांत

स्तंभ तिथे ना कुणी बांधला, पेटली ना वात

धगधगता समराच्या ज्वाला या देशासाठी
जळावयास्तव संसारातून उठोनिया जाशी

मूकपणाने तमी लोपती संध्येच्या रेषा
मरणामध्ये विलीन होसी, ना भय ना आशा

जनभक्तीचे तुझ्यावरी नच उधाणले भाव
रियासतीवर नसे नोंदले कुणी तुझे नाव

जरी न गातील भाट डफावर तुझे यशोगान
सफल जाहले तुझेच हे रे तुझे बलिदान

काळोखातूनी विजयाचा हे पहाटचा तारा

प्रणाम माझा पहिला तुजला मृत्युंजय वीरा 

-कुसुमाग्रज


अनाम वीर 

अन्त तुम्हारा जहॉं हो गया हे अनाम वीर |

वहॉं  दिखता  दिया   जलता स्तंभ यादगार || ||

समरज्वाला से भड़का जब देश का अम्बर |

कूद पड़े तुम उस ज्वाला में छोड़के घरबार || ||

ॲंधियारे में बुझती जैसे संध्या की रेषा |

मिट गये तुम छोड़के सारी भीति और आशा || ||

जनसागर ने कभी तुम्हारी की ना जयकार |

इतिहास में नाम तुम्हारा हुआ उजागर || ||

डफली पर ना बजे तुम्हारा श्रेष्ठ  यशोगान |

सफल असल में हुआ तुम्हारा महान बलिदान || ||

अंधियारे से उगता देखो जय का वह तारा  | 

हे मृत्युंजयस्वीकार करो तुम प्रणाम  मेरा || ||

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