हंसो और जियो
क्या आज आप हंसे? नहीं हंसे? ऐसा इसलिए क्योंकि आप हंसी का महत्व नहीं जानते |
हम सभी को हसना बहुत पसंद हैं . लेकिन हसने के पीछे का विज्ञान बहुत कम लोग जानते हैं . यह पुस्तक वह ज़रुरत पूरी करती हैं . लेकिन ध्यान में लीजिये, यह कोई चुटकुलों की किताब नहीं हैं .
पुस्तक एक संक्षिप्त परिचय के साथ शुरू होती है. फिर रोस ने हँसी के पीछे के पूरे दर्शन और अभ्यास का ग्यारह अध्यायों में विवरण किया है.
१. हंसने के पीछे भी इतिहास आहे
हंसो मत. लेकिन हंसने का महत्त्व इतिहास में भी दर्ज़ हुआ हैं. अध्याय 1 में रॉस हमें हसी का संक्षिप्त इतिहास बताती हैं . रॉस के अनुसार हंसी का इतिहास बहुत पुराना है. बाइबल जैसे धार्मिक ग्रंथों में धर्म जैसे गंभीर विषयों के बावजूद चटपटे अभिप्राय मिलते हैं . प्राचीन मिस्र में, फिरौन और रानियों के मनोरंजन के लिये विदूषक नियुक्त किये जाते थे, यह हमें रॉस बताती हैं .
२. हंसो और जीवन फुलाओ
अध्याय 2 में रॉस खुलासा करती हैं कि हसने का मकसद सिर्फ जीवन को ज़ारी रखना नहीं बल्कि जीवन बढ़ाना, फूलाना, फलाना हैं . हम सब जानते हैं कि बच्चे अधिक हसते हैं, बड़े लोग कम हसते हैं. हमें, वयस्कों के रूप में, अलग-अलग स्थितियों में हसी खोजने के अधिक से अधिक अवसर खोजने चाहिये . रॉस का मानना यह हैं कि कोई बीमारी जिस तरह संक्रमण से फैलती हैं, बिलकुल उसी तरह से हसी भी संक्रमण की तरह फैलती हैं .
३. हंसी, सब बीमारीयों की दवा
अध्याय 3 में रॉस हमें बताती हैं कि हसी सब बीमारीयों की सर्वोत्तम दवा हैं, क्यों कि हसी तनाव को दूर करने का काम करती है. यह हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली पर अच्छा प्रभाव डालता है. यह दर्द से राहत दिलाने, फिट रहने, कैलोरी कम करने आदि में भी मदद करती है. जब हम थके हुए होते हैं तो हसी हमें तरोताजा कर देती है.४. योग करो-हंसने का
हसी के बारे में इतना सब जानने के बाद अध्याय 4 में रॉस हमें एक नई संकल्पना के बारे में बताती हैं जिस का नाम हैं 'हास्य योग' . ज़ाहिर हैं इस संकल्पना का जन्म पूर्व में हुआ हैं . हास्य योग में जानबूझकर हसी उत्पन्न करनेके तरीक़े अपनाये जाते हैं. एक संरचित सूत्र के माध्यम से हंसी को उत्तेजित किया जाता हैं . इसमें ताली बजाने और गहरी सांस लेने जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाता है. हास्य योग शरीर, मन और आत्मा के लिए स्वास्थ्य पैदा करता है, जो विशेष रूप से तब उपयोगी होता है जब आप कठोर परिस्थितियों का सामना करते हैं. रोस बताते हैं कि बूढ़ापे का समय सभी के लिए कठिन होता हैं, लेकिन हसी उसकी कठोरता को कम करने में मदद करती हैं.
लेखिका प्राकृतिक हसी के महत्व को रेखांकित करती है, जबकि यह भी दर्शाती है कि कृत्रिम हसी भी हमे प्राकृतिक हंसी जैसी लाभकारी हो सकती है. यह इस विचार का समर्थन करती है कि हसी, चाहे वह स्वाभाविक हो या प्रेरित, हमारे कल्याण पर सकारात्मक प्रभाव डालती है.
५. हंसना-हमारा सिक्स्थ सेन्स
अध्याय 5 में रॉस हसी के बारे में और एक अभिनव संकल्पना प्रस्तुत करती हैं . हम जानते है कि हमारे पाच ज्ञानेंद्रिय और उन के चलते पाच संवेदनाऍं होती है . परंतु रोस मानते हैं कि हसी एक सिक्स्थ सेन्स याने छठी संवेदना है . हसी एक जटिल व्यवहार हैं जिसमें संज्ञानात्मक और भावनात्मक प्रतिक्रियाएं शामिल हैं. एक बार जब कोई उत्तेजना हास्य के रूप में समझी जाती है, तो यह एक सचेतन या अचेतन प्रतिक्रिया शुरू कर देती हैं जिसके परिणामस्वरूप एक शारीरिक , संज्ञानात्मक या भावनात्मक प्रतिक्रिया होती है। इस वजह से हम हसी को छठी संवेदना कह सकते है.
६. यह कंबख्त हंसी कैसे बढा़ये?
अध्याय 6 में हसी बढाने के लिये या उत्पन्न करने के लिये हम क्या कर सकते हैं इसपर रॉस विमर्ष करती हैं . इस के लिये शाब्दिक खेल याने वर्ड प्ले, बोर्ड गेम्स, ऑनलाइन गेम्स, चुटकुले, मजाकिया मज़ाक, शारीरिक खेल इत्यादि की सिफारिश रॉस करती हैं . रॉस सुझाव देती हैं कि हम हमारे ऑफीस को एक खेल की जगह में बदल दे। रोस यह स्पष्ट करती हैं कि हसी का प्रभाव सबसे शुष्क विषयों को भी दिलचस्प बना सकता है.
७. जो तुम हंसोगे तो दुनिया हंसेगी
आप ने अक्सर यह वचन सुना होगा कि 'मुस्कुराओ और पूरी दुनिया तुम्हारे साथ मुस्कुराएगी' . अध्याय ७ में रॉस इसी वचन को दोहराती हैं . रोस के अनुसार, मुस्कुराहट केवल हमारे निजी जीवन तक ही सीमित नहीं है; वे हमारे कामकाजी माहौल को भी छानती हैं और हमारी बातचीत की प्रकृति को भी प्रभावित करती हैं. एक मुस्कुराता हुआ व्यक्ति न केवल अधिक पसंद किया जाता है, बल्कि अधिक विनम्र और अधिक प्रतिस्पर्धी भी पाया जाता है.
८. शुकरिया कहो
अध्याय ८ में रोस आभार के महत्व को स्पष्ट करती हैं . वह कहती हैं कि आभारप्रदर्शन केवल उपचार न हो परंतु प्रसन्नतापूर्ण हो . आभार व्यक्त करने से सकारात्मक प्रभाव पैदा होता है और अंधेरे बादल के चांदी के अस्तर की तरह उस से हमें सोचने में मदद मिलती है. आभार को आभार पत्रिका, आभार पत्र लिखकर, आभार की भाषा का उपयोग करके और अन्य तरीकों से व्यक्त किया जा सकता है.
९.रहम करो, अपने उपर
स्वयं प्रति सहवेदना या आत्मकरुणा का बड़ा महत्त्व हैं . रोस अध्याय ९ में बताते हैं कि मुस्कुराहट के साथ आत्म-करुणा कई तरह के स्वास्थ्य लाभों से जुड़ी है, जिसमें सकारात्मकता, आशावाद, खुशी का उच्च स्तर और चिंता और अवसाद का निम्न स्तर शामिल है. यह आंतरिक निर्णय को आंतरिक आनंद, आंतरिक घृणा को आंतरिक प्रेम और आंतरिक दुःख को आंतरिक कृतज्ञता से बदलने का एक शक्तिशाली अवसर प्रदान करता है.
१०. डायरी लिखो-हंसने की
कई लोगों को डायरी लिखने की आदत होती हैं . अध्याय १० में रॉस सिफारिश करती हैं कि इसी आदत को जर्नलिंग में बदल दिया जाये जो आनंदपूर्ण हो . रोस का मानना है कि आनंदपूर्ण जर्नलिंग सिर्फ़ डायरी लिखने से अलग है. यह लिखित शब्द में हसी के प्रभाव को एकीकृत करता है, जो हास्य, हसी और हल्केपन की ओर तंत्रिका मार्गों को मजबूत करने का एक और साधन प्रदान करता है.
११. आखरी हंसी कैसी हो
अब रॉस ११वे अध्याय में अंतिम हसी के बारे में बात करती हैं . रोस निष्कर्ष निकालते हैं कि हसी के प्रभाव से दुनिया की बुराइयों पर विजय तो नहीं पा सकता, लेकिन यह इसे प्यार के करीब ले जाएगा, और व्यापक समुदाय में फैल जाएगा.
पुस्तक समाप्त होने के बाद, रोस हसी के प्रभाव को व्यवहार में लाने के लिए कुछ सुझाव देते हैं .इसमें कई गतिविधियाँ और तकनीकें शामिल हैं. इसमें मौजमस्ती करने और साथ में हसने के अवसर पैदा करना शामिल है. सोते वक्त मज़ेदार कहानिया बनाना और अपने बच्चे को योगदान देने के लिए आमंत्रित करना शामिल है.
रोस ने अपनी बातों को साबित करने के लिए कई केस स्टडी भी शामिल किए हैं. पृष्ठ 91 पर एक उल्लेखनीय उदाहरण में यह बताया गया है कि कैसे नाजी यातना शिविरों में कैद यहूदियों ने अपने उत्पीड़कों को हसी के माध्यम से पराजित किया, जिससे अत्याचार पर हसी की विजय का उदाहरण प्रस्तुत होता है.
समीक्षा:
शब्दावली और संसाधनों जैसे परिशिष्ट रोस द्वारा पुस्तक लिखने के लिए की गई मेहनत को ये दर्शाते हैं.
हसी के विभिन्न पहलुओं जानने और अपना जीवन अधिक आनंदपूर्ण करने के लिये यह पुस्तक बेशक पढ़ने लायक और अपने संग्रह में शामिल करने योग्य है.
पुस्तक के बारे में:
The Laughter Effect
(How to build joy, resilience and positivity in your life)
-by Ros Ben-Moshe
यह पुस्तक रोस बेन-मोशे द्वारा लिखी और नीरो प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की गई है.
लेखक-परिचय:
इस पुस्तक की लेखिका रोस बेन-मोशे एक स्वास्थ्य विशेषज्ञ हैं. लेखिका एक अकादमिक शोधकर्ता हैं और हँसी की सकारात्मकता और लचीलेपन में विशेषज्ञ हैं.
लेखिका एक बड़ी सर्जरी से गुज़री थी, जब हसने के हितकारी परिणाम से उन्हें ठीक होने में सहायता हुई. आइये अब जानते हैं कि क्या हैं इस पुस्तक में .
डिस्क्लेमर:
'द लाफ्टर इफ़ेक्ट-हाउ टू बिल्ड जॉय, रेजिलिएंस एंड पॉज़िटिविटी इन योर लाइफ़' इस पुस्तक की यह संक्षिप्त समीक्षा है. यह पुस्तक अंग्रेजी भाषा में लिखा गया हैं . इस पुस्तक का हिंदी अनुवाद उपलब्ध हैं या नहीं इस बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं हैं .
यह केवल समीक्षा है. समीक्षक पुस्तक पर किसी प्रकार के कॉपीराइट का दावा नहीं करता है. कॉपीराइट लेखक/प्रकाशक के पास है. इस समीक्षा में किये हुए पुस्तक के उल्लेख और पुस्तक में दिये हुए विषयों की चर्चा का हेतु केवल शिक्षा या मनोरंजन हैं .
-by Dr Hemant Junnarkar
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